सतना जिले में मातृ मृत्यु के मामले बढ़कर 37 पहुंचे, जो स्वास्थ्य व्यवस्था की कमजोरियों को दर्शाते हैं। एनीमिया, हाई बीपी और समय पर इलाज न मिलने से अधिकतर मौतें हुईं, ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति चिंताजनक बनी।
सिंगरौली जिले में क्रेशर संचालक शासन की गाइडलाइन को नजरअंदाज कर मनमानी से खदानें संचालित कर रहे हैं। धूल और डस्ट से ग्रामीण बीमार हो रहे हैं, दमा और सांस की बीमारियां बढ़ रही हैं। क्रेशर संचालन के लिए जरूरी बाउंड्रीवाल, वृक्षारोपण और पानी का छिड़काव तक नहीं किया जा रहा। जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई के बजाय चुप्पी साधे बैठे हैं।
सतना जिले में बरसात के चलते संक्रामक रोगों का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। उल्टी, दस्त, पीलिया, हैजा, मलेरिया और डेंगू जैसे रोगों की रोकथाम के लिए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल टीमों का गठन किया है। सभी ग्रामों में डिसइंफेक्शन और जागरूकता अभियान जारी है।
चित्रकूट जिले के थर पहाड़ गांव में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में मरीजों को पीठ पर लादकर अस्पताल ले जाना पड़ता है। यह स्थिति विकास की हकीकत और सिस्टम की असलियत को उजागर करती है।
















